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शिक्षा जगत के महानायक और शिक्षक राजनीति के उभरते सितारे डॉ सुनील उपाध्याय

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सियासी सूरमा

  • चार सौ नब्बे संस्थानों की मुखर आवाज जानिए कैसे आप्टा, के जरिए शिक्षकों के मसीहा बने डॉ सुनील उपाध्याय
  • जब प्रबुद्ध लोग राजनीति में आएंगे तभी होगा कायापलट टीएनएफ टुडे पर पढि़ए इंग्लिश गुरु का बेबाक विजन
  • क्लासरूम से संगठन के शीर्ष मंच तक ताजनगरी में वैचारिक शुचिता के प्रतीक बने डॉ सुनील उपाध्याय
  • कोरोना काल के संकट से अनाथ आश्रमों की सेवा तक जन सरोकारों को समर्पित एक सच्चा और कर्मठ सूरमा

समकालीन राजनीति में जब बाहुबल और धनबल का प्रभाव लगातार बड़ रहा है तब समाज का प्रबुद्ध और पढ़ा लिखा वर्ग अक्सर राजनैतिक गलियारों से दूरी बनाना ही बेहतर समझता है। लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर यह एक अकाट्य सत्य है कि जब तक उच्च शिक्षित चरित्रवान और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित बुद्धिजीवी वर्ग राजनीति की मुख्यधारा में नहीं आएगा तब तक राजनीति का वास्तविक कायापलट होना असंभव है। ताजनगरी आगरा की धरा पर शिक्षा जगत में एक अमिट पहचान बनाने वाले और शिक्षक राजनीति के नए वैचारिक युग की शुरुआत करने वाले डॉ सुनील उपाध्याय एक ऐसा ही बेदाग और बेहद सम्मानीय चेहरा हैं। भारतीय जनता पार्टी महानगर के शिक्षक प्रकोष्ठ के संयोजक और ऐतिहासिक आगरा कॉलेज आगरा के ट्रस्टी डॉ सुनील उपाध्याय ने अपनी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता से यह साबित कर दिया है कि एक सच्चा शिक्षक केवल क्लासरूम के भीतर ही नहीं बल्कि समाज और संगठन के हर धरातल पर बदलाव का सबसे बड़ा संवाहक बन सकता है।

आप्टा का अभूतपूर्व गठन और कोचिंग संस्थानों के हक की लड़ाई

डॉ सुनील उपाध्याय ने आज से ठीक तेरह वर्ष पूर्व यानी वर्ष 2013 में दूरदर्शी सोच के साथ आप्टा अर्थात एसोसिएटेड प्रोग्रेसिव टीचर्स एसोसिएशन का गठन किया था। जिसने आगरा में दम तोड़ती शिक्षक राजनीति को एक नई संजीवनी प्रदान की। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों मुख्य रूप से कोचिंग सेंटरों और निजी शिक्षकों की समस्याओं को न केवल मुखर आवाज दी बल्कि उनके मान सम्मान की रक्षा के लिए हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। आज उनकी इस संस्था आप्टा से आगरा शहर और देहात क्षेत्र के कुल चार सौ नब्बे शिक्षण संस्थान पूरी दृढ़ता के साथ जुड़े हुए हैं जो डॉ उपाध्याय की अद्भुत संगठन क्षमता का जीवंत प्रमाण है। शिक्षकों के सुख दुख में आधी रात को भी ढाल बनकर खड़े रहने वाले डॉ सुनील उपाध्याय ने व्यवस्था के सामने शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों की जायज मांगों को मनवाने के लिए हमेशा एक मजबूत और निर्भीक योद्धा की तरह संघर्ष किया है।

विद्यार्थियों के प्रिय इंग्लिश गुरु और हजारों करियर के मेंटर

डॉ सुनील उपाध्याय जी केवल एक राजनैतिक मार्गदर्शक नहीं हैं बल्कि विद्यार्थियों के बीच वे एक अत्यंत लोकप्रिय मेंटर और इंग्लिश गुरु के रूप में पूजे जाते हैं। उनकी सरल भाषा शैली और गहन ज्ञान ने हजारों विद्यार्थियों के जीवन की दिशा को पूरी तरह बदल दिया है। उनके कुशल मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त करके आज देश भर में अनगिनत विद्यार्थी पढ़ लिखकर आईएएस आईपीएस आईआईटियन और प्रतिष्ठित डॉक्टर बनकर देश की सेवा कर रहे हैं। डॉ उपाध्याय का मानना है कि शिक्षा केवल डिग्रियां बांटने का साधन नहीं है बल्कि यह मनुष्य के भीतर राष्ट्र प्रथम की भावना और नैतिक चरित्र का निर्माण करने वाली एक पवित्र प्रक्रिया है। इसी सोच के साथ वे समाज के हर तबके के युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

जन सेवा का अद्भुत जुनून और कोरोना काल के देवदूत

डॉ सुनील उपाध्याय जी के भीतर जन सेवा का एक अभूतपूर्व और असीम जुनून समाया हुआ है। वे अपने शिक्षक साथियों के साथ मिलकर लगातार सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहते हैं जहां सर्दियों के मौसम में जरूरतमंदों को कंबल गर्म वस्त्र और भोजन का वितरण करना उनकी स्थाई दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। जब देश कोरोना महामारी के भीषण और जानलेवा संकट से जूझ रहा था और मध्यम वर्ग तथा गरीब परिवारों के सामने आजीविका का भयंकर संकट खड़ा हो गया था उस दौरान डॉ सुनील उपाध्याय ने देवदूत बनकर कमान संभाली। उन्होंने अपने शिक्षक साथियों के सहयोग से आगरा के बारह सौ से अधिक पीडि़त परिवारों तक सीधे राशन दवाई और हर संभव आर्थिक मदद पहुंचाई। इसके साथ ही वे अनाथ आश्रमों और वृद्धाश्रमों में जाकर वहां रह रहे बुजुर्गों और बेसहारा बच्चों के जीवन में खुशियां बिखेरने का कार्य पूरी खामोशी और निस्वार्थ भाव से लगातार करते आ रहे हैं।

डॉ सुनील उपाध्याय जी का यह स्पष्ट विजन है कि यदि देश को सचमुच एक महान शक्ति बनाना है तो शिक्षक वर्ग को राजनीति में अपनी मुखर और निर्णायक भूमिका निभानी ही होगी। आगरा कॉलेज के ट्रस्टी के रूप में शैक्षणिक सुधारों के प्रति उनका समर्पण और भाजपा महानगर के शिक्षक प्रकोष्ठ के संयोजक के रूप में राष्ट्रवाद की अलख जगाने का उनका यह अभियान आज के दौर में बेहद अनुकरणीय है। जब ऐसे अत्यधिक पढ़े लिखे संवेदनशील और व्यावहारिक सोच रखने वाले व्यक्तित्व राजनीति में आगे बढ़ते हैं तो पूरी व्यवस्था का शुद्धिकरण स्वत: होने लगता है। टीएनएफ टुडे डॉ सुनील उपाध्याय जी के इस गरिमामयी और प्रेरक व्यक्तित्व को सलाम करता है और यह पूरी उम्मीद करता है कि आने वाले समय में ताजनगरी की जनता और संगठन को उनके नेतृत्व का एक और बड़ा और व्यापक फलक देखने को मिलेगा।

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